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जहरीला पेड़

     गाँव के सभी लोग बड़ी हंसी खुशी एक दूसरे के साथ जिंदगी बिताते थे। जब भी किसी को कोई दुःख होता तो सारा गाँव रोता और जब एक के यहाँ खुशी होती तो सारा गाँव जश्न में डूब जाता। न कोई ऊँचा न कोई नीचा। सब एक मिट्टी की बनावट, यही फलसफा था उनका।     अचानक कुछ लोगों को अजीब सी बीमारी आने लगी। पता चला कि गाँव की तरफ आने वाली बयार के रास्ते में एक जहरीला पेड़ उग आया है। जिसे छूकर बहने वाली हवा दूषित होकर कुछ कमजोर लोगों में बीमारी फैला रही है। पहले तो कुछ रूढ़िवादियों ने इसे ईश्वरीय पेड़ मानते हुये भगवान की मर्जी करार दी और उस पेड़ को खाद पानी देकर फलने फूलने दिया। इसकी समस्या यह थी कि यह विष सिर्फ एक निश्चित स्तर से कमजोर शरीर पर ही असर करता था जिसकी वजह से मजबूत शरीर वालों को इसमें कोई बुराई नजह ही नहीं आई। उन्होंने हमेशा यही माना कि यह उनकी (कमजोरों) की नियति है।      समय बदला और कमजोर वर्ग व बुद्धिजीवी वर्ग के कुछ लोगों ने समाधान के तौर पर कमजोर लोगों के मकानों को विस्थापित करना शुरू किया। कुछ ने उस जहरीले पेड़ की शाखाओं को काटना छाटना शुरू क...